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क्‍या नाराजगी दूर करने को पीएम ने की डॉ सोनेलाल पटेल की तारीफ! राजनैतिक गलियारों में लगने लगी अटकलें

लखनऊ
यूपी के सोनभद्र में पीएम नरेंद्र मोदी ने अपना दल के संस्थापक स्व. डॉ सोनेलाल पटेल की तारीफ सिर्फ एक भाषण भर के लिए नहीं की थी। राजनैतिक गलियारों में इस तारीफ के अलग-अलग निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। इस तारीफ के पीछे ओबीसी और खासकर कुर्मी वोटबैंक को देखा जा रहा है, जिस पर अपना दल (एस) की खासी घुसपैठ है। माना जा रहा है कि पीएम की यह तारीफ एनडीए के साथी अपना दल (एस) की लगातार बढ़ रही नाराजगी दूर करने की कोशिश की है। अगर यह सच है तो आने वाले समय में मोदी या फिर योगी के मंत्रिमंडल में अपना दल (एस) की भूमिका बढ़ सकती है।

लोकसभा चुनाव से शुरू हुई नाराजगी
2019 लोकसभा चुनाव के पहले तक बीजेपी और अपना दल (एस यानी सोनेलाल) के बीच कोई नाराजगी नहीं थी। मोदी वन सरकार में अपना दल (एस) की प्रमुख अनुप्रिया पटेल मंत्री थीं। उनके पति आशीष सिंह पटेल को बीजेपी ने विधानपरिषद भेज दिया था। लेकिन लोकसभा चुनाव में सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच खींचतान शुरू हुई। इसी बीच अनुप्रिया और आशीष ने कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की। बीजेपी नेतृत्व को यह मुलाकात नागवार गुजरी। बीजेपी ने तत्काल तो इसे मैनेज कर लिया लेकिन इसका असर मोदी के दूसरे कार्यकाल में बनी सरकार के मंत्रिमंडल में देखने को मिला। केंद्रीय मंत्रिमंडल में अनुप्रिया को दोबारा स्थान नहीं मिला।

सहयोगी की अनदेखी
उधर, अपना दल (एस) के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि लोकसभा चुनाव के बाद लगातार बीजेपी सरकार उनके दल की अनदेखी कर रही है। अपना दल (एस) की लगातार मांग के बाद साढ़े तीन साल की प्रदेश सरकार में एक भी योजना (पुल या सड़क) का नामकरण डॉ. सोनेलाल के नाम पर नहीं किया गया। इतना ही नहीं, आशीष सिंह पटेल को आवास आवंटित करने में सरकार ने लंबा समय लगा दिया, जबकि उनकी ही पार्टी के विधानमंडल दल के नेता को वीआईपी कॉलोनी में आनन-फानन में बड़ा बंगला दे दिया गया। अपना दल के जेल मंत्री ने एक जेलर के खिलाफ रिश्वत देने की एफआईआर करवाई, लेकिन जेलर को आज तक निलंबित नहीं किया गया। अपना दल (एस) की नाराजगी की इसी तरह के कई छोटी बड़ी वजहें हैं।

विधानसभा चुनाव भी मजबूत वजह
2022 में यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजनैतिक जानकारों का कहना है कि पश्चिमी यूपी में पिछड़ा वर्ग का मजबूत वोटबैंक हैं। ओम प्रकाश राजभर से पहले ही बीजेपी की दूरी हो चुकी है। ऐसे में बीजेपी चुनाव से पहले अपना दल (एस) को दूर नहीं करना चाहेगी। पिछले विधानसभा चुनाव में अपना दल एस को बीजेपी ने गठबंधन के तहत 11 सीटें दी थी, जिसमें अपना दल ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की थी। माना जाता है कि पूर्वांचल में जीत के लिए जातीय चौसर बिछाने का हुनर आना बहुत जरूरी है। इसी हुनर के लिए बीजेपी चुनाव से पहले पिछड़ों और खासकर कुर्मियों में मजबूत पकड़ रखने वाले अपना दल एस को दूर नहीं करना चाहती।

गठबंधन से ही सधेगा जातीय समीकरण
अपना दल (सोनेलाल) का बेस वोटबैंक ओबीसी और उसमें भी मूलरूप से कुर्मी वोटर है। यूपी के जातीय ब्लू प्रिंट पर नजर डाले तों पूर्वांचल के साथ मध्य उप्र की करीब तीन दर्जन विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कुर्मी, पटेल, वर्मा और कटियार वोटर निर्णायक की भूमिका निभाते रहें हैं। पूर्वांचल में ही करीब 16 जिले ऐसे हैं, जिनमें कभी आठ फीसदी तो कहीं 12 से 15 फीसदी तक कुर्मी वोटर राजनैतिक समीकरण बदलने की हैसियत रखते हैं।

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