Friday, October 23, 2020

OPINION: लद्दाख में महत्‍व खोती दिख रही है LAC, चीन को खतरा भांपकर लौटना चाहिए

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीएस हुड्डा

नई दिल्‍ली. पूर्वी लद्दाख (Ladakh) के हालात जो काफी समय से मीडिया से गायब हो गए थे, वे पिछले हफ्ते फिर सुर्खियों में आ गए. भारतीय सेना (Indian Army) ने फुर्ती दिखाते हुए चुशूल सेक्‍टर की ऊंची पहाडि़यों पर कब्‍जा जमा लिया ताकि ऊपर से पूरे LAC पर चीन (China) की हरकतों पर नजर रखी जा सके. इससे सैन्य, कूटनीतिक और राजनीतिक गतिविधियों की बाढ़ सी आ गई है. भारत और चीन के रक्षा मंत्रियों ने मॉस्को में आमने-सामने की बैठक भी की दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े हैं. चीन कहता है कि वो अपनी एक इंच जमीन का नुकसान नहीं करेगा. तो वहींं भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने के लिए दृढ़ निश्चयी है. हालांकि, LAC पर शांति और शांति की बहाली के लिए सैन्य और राजनयिक बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है.

हमने ऐसा देखा है कि भारत सरकार की तरह से इस तरह का साफ संदेश है कि उसका ध्‍यान जारी मौजूदा संकट को हल करने के लिए बुनियादी तौर पर कूटनीतिक माध्‍यम पर है. हालांकि सैन्य विकल्प पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में कहा, ‘मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि LAC पर स्थिति का समाधान कूटनीतिक तौर पर खोजा जाना है. मैं इस बात को जिम्मेदारी के साथ कहता हूं.’

दोनों देशों के लिए यह बेहतर होगा कि LAC पर जारी गतिरोध को बातचीत के जरिये सुलझाया जाए, लेकिन जब तक कि सैनिकों की संख्‍या कम करने की प्रक्रिया (Disengagement) में कुछ प्रगति नहीं होती है, जमीनी स्थिति में अचानक गिरावट देखी जा सकती है जो कूटनीतिक प्रक्रिया को पटरी से उतार सकती है. मेरी ये टिप्‍पणी तीन वास्तविकताओं पर आधारित है, जिनका सामना दोनों देशों की सेनाएं एलएसी पर कर रही हैं.

पहला, वो समझौते और प्रोटोकॉल पूरी तरह से भंग हुए हैं जो उस समय सैनिकों को निर्देशित करते हैं जब वे एक-दूसरे के आमन-सामने होते हैं. बल और हिंसा का इसतेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित है. 2014 में चूमार विवाद के दौरान प्रत्येक ओर से कम से कम एक हजार सैनिक एक-दूसरे से कुछ गज की दूरी पर हा गए थे. उस समय सेना के उत्तरी कमान मुख्यालय में इस बात की चिंता थी कि जमीन पर सैनिकों के बीच कुछ लोकल विवाद बढ़कर नियंत्रण से बाहर नहीं जाने चाहिए. हालांकि खुशकिस्‍मती रही कि शांति बहाल हो गई थी.

अब गलवान घाटी की क्रूर घटना और सैनिकों की जान जाने के बाद स्थानीय कमांडरों को स्वतंत्र अधिकार के साथ प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल को संशोधित किया गया है ताकि वे उपयुक्‍त कार्रवाई कर सकें. चीनी सेना की कार्रवाई को ध्यान में रखते हुए ये उचित आदेश हैं, लेकिन इससे युद्ध की ओर बढ़ने की आशंकाएं भी अधिक हैं.

दूसरा, दोनों देशों की सेनाओं या पक्षों में अविश्वास भी एक बड़ा कारण है. मई की गलवान घाटी की घटना के बाद अब भारतीय सेना चीन के हर कदम को संदेह की नजर से देखेगी. यह अविश्वास भी सैन्‍य स्‍तर पर आगे बढ़ता जाएगा. इससे पहले अतीत पर नजर डालें तो दोनों सेनाओं के बीच सीमा पर होन वाली बैठकें LAC में शांति बनाए रखने के लिए एक बहुत प्रभावी माध्‍यम रही हैं.

मुझे याद है कि 2015 में पीएलए के साथ हमारी लगभग 50 सीमा बैठकें हुई थीं. इनमें से कुछ औपचारिक थीं लेकिन अधिकांश बैठकें एलएसी पर छोटे छोटे विवाद सुलझानें के लिए थीं. इन बैठकों में शत्रुता की कमी थी. कोशिश यह रहती थी कि विवादों को सुलझा लिया जाए.

तीसरा, पूर्वी लद्दाख में LAC अपना महत्‍व खो चुकी है. इस क्षेत्र में कुछ ‘विवादित क्षेत्र’ जरूर मौजूद हैं, लेकिन दोनों देशों को ये स्पष्ट रूप से साफ है कि फैसले किए जा चुके क्षेत्रों का सम्‍मान किया जाना चाहिए. अब गलवान, पैट्रोलिंग पॉइंट 15 और गोगरा इलाके पूरी तरह से खुले हैं. इन जगहों पर पहले कभी भी इतना तनाव नहीं देखा गया था. भारतीय सैनिक एलएसी के करीब किसी भी कथित चीनी गतिविधि पर प्रतिक्रिया कैसे देंगे, यह चुशूल सेक्टर में उनकी प्रतिक्रिया से स्पष्ट है.

यह भी पढ़ें: TMC सांसद नुसरत जहां ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

यह स्पष्ट है कि देश पूर्ण तरह से संघर्ष चाहता है. फिर भी जमीन पर हालात और अधिक खराब हो सकते हैं. इसमें विश्‍वास की कमी ही दोनों देशों की सेनाओं की बीच सैन्य कार्रवाई का कारण बनेगी. स्थानीय घटनाएं नियंत्रण से बाहर हो सकती हैं. दोनों देशों को अपने सैन्य विकल्प तैयार होंगे, लेकिन ये विकल्प राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा होने चाहिए, न कि स्थानीय सैन्य गतिशीलता का परिणाम.

चीन को उस खतरे को पहचानना चाहिए जो सीमा पर उसके जोखिम भरे कार्य से पैदा हुआ है. डिएस्‍केलेशन प्रक्रिया पर मौजूदा गतिरोध केवल सैन्य कार्रवाई के जोखिमों को बढ़ाएगा. दोनों देशों के उच्च-स्तरीय राजनयिकों को डिएस्‍केलेशन के मामले पर चर्चा करनी चाहिए. जब तक इन मामलों को अंतिम रूप नहीं दिया जाता है, यह सैन्य-स्तर की वार्ता के साथ जारी रखने के लिए बहुत कम उद्देश्य से काम करेगा.

राजनयिक हिस्‍सेदारी को LAC पर सैन्य गतिविधि के लिए कुछ नए प्रोटोकॉल लगाने पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिए. पुराने प्रोटोकॉल भंग हो गए हैं और उन्हें ठीक नहीं किया जा सकता है. एक नए रूप की आवश्यकता है. यह विचार किसी भी नए मोर्चे के उद्घाटन को प्रतिबंधित करने के लिए होना चाहिए क्योंकि यह समग्र वार्ता प्रक्रिया को पूरी तरह से समाप्त कर सकता है. (नोट: यह लेखक के निजी विचार हैं. लेखक भारतीय सेना में उत्‍तरी कमांडर रहे हैं. उनके नेतृत्‍व में ही 2016 में पाकिस्‍तान पर सर्जिकल स्‍ट्राइक हुई थी.)

Most Popular

RJD ने उम्मीदवारों के नाम का किया ऐलान

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजद (RJD) ने अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा शुरू कर दी है. आरजेडी ने अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान करना शुरू कर दिया है.

OPINION: लद्दाख में महत्‍व खोती दिख रही है LAC, चीन को खतरा भांपकर लौटना चाहिए

भारतीय सेना (Indian Army) ने फुर्ती दिखाते हुए चुशूल सेक्‍टर की ऊंची पहाडि़यों पर कब्‍जा जमा लिया ताकि ऊपर से पूरे LAC पर चीन (China) की हरकतों

Dil Bechara :सुशांत सिंह राजपूत की आखिरी फिल्म न्यूजीलैंड में हुई रिलीज

सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म Dil Bechara को देख उनके फैंस काफी भावुक भी हुए थे, हाल ही में एक्टर की आखिरी फिल्म की स्क्रीनिंग न्यूजीलैंड

New Business Opportunity-इस बिजनेस में सिर्फ 50 हजार रुपये लगाकर करें 2.5 लाख से ज्यादा की कमाई

New Business Opportunity-इन दिनों मशरूम की मांग में अचानक इजाफा हो गया है. इसके पीछे कोरोना को बताया जा रहा है. अगर आप भी...

TMC सांसद नुसरत जहां ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

TMC सांसद ने निशाना साधते हुए पीएम मोदी से पूछा कि अब ना तो पबजी का रीवाइवल (पुनर्जीवन) होगा और ना ही अर्थव्यवस्था का। ऐसे में हम क्या करें?

Rishi Kapoor के जन्मदिन पर रिद्धिमा को आई पापा की याद

ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) की बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी (Riddhima Kapoor) ने सोशल मीडिया पर अपने पिता को याद करते हुए कुछ पुरानी तस्वीरें...

IPL 13 : विराट कोहली ने पकड़ा कमाल का कैच, देखें वीडियो

IPL 13 की उल्टी गिनती शुरु हो गई है और सभी टीम्स ने अपनी प्रैक्टिस के जरिए मैच की तैयारियों को पुख्ता करना शुरु...

उत्तर प्रदेश में जातिगत सर्वे पर बवाल, आप नेता संजय सिंह बोले- मैंने कराया, मुझसे सवाल करो

उत्तर प्रदेश में बीते मंगलवार को लोगों के फोन पर एक सर्वे कॉल किया जा रहा था, जिसमें उनसे यह पूछा जा रहा था...