Home धर्म-संस्कृति यहां जानें कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व और पौराणिक कथा

यहां जानें कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व और पौराणिक कथा

नई दिल्ली:

30 नवंबर यानि की सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा  मनाई जाएगी. हिंदू धर्म में इस दिन का खासा महत्व है. कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर लोग गंगा स्नान और दान-पुण्य जैसे कार्य करते हैं. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा कहलाती है.  कार्तिक मास की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा, त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है.

मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन गंगा स्नान करने से पूरे साल गंगा स्नान करने का फल मिलता है. इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों और तीर्थों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है, पापों का नाश होता है.

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कार्तिक पूर्णिमा के दिन दिन गंगा-स्नान,दीपदान,अन्य दानों आदि का विशेष महत्त्व है.  इस दिन क्षीरसागर दान का अनंत महत्व है. क्षीरसागर का दान 24 अंगुल के बर्तन में दूध भरकर उसमें स्वर्ण या रजत की मछली छोड़कर किया जाता है.  कार्तिक पूर्णिमा के दिन दिवाली की तरह शाम के वक्त दीए भी जलाएं जाते हैं. इस दिन को देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है.

इस कार्तिक पूर्णिमा का महत्व न केवल वैष्णव भक्तों के लिए ही है, बल्कि शिव भक्तों और सिख धर्म के लोगों के लिए भी इसके खास मायने हैं. विष्णु के भक्तों के लिए भी यह दिन इसलिए बहुत खास माना गया है, क्योंकि भगवान विष्णु का पहला अवतार इसी दिन हुआ था.

सिख धर्म  में कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

सिख धर्म में कार्तिक पूर्णिमा को प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है. दरअसल, इसी दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरु नानक देव का जन्म हुआ था. इस दिन सिख सम्प्रदाय के अनुयाई सुबह स्नान कर गुरुद्वारों में जाकर गुरुवाणी सुनते हैं और नानक जी के बताए रास्ते पर चलने की सौगंध लेते हैं. इसे गुरु पर्व भी कहा जाता है.

भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का किया था वध-

इस संदर्भ में एक कथा है कि त्रिपुरासुर नाम के दैत्य के आतंक से तीनों लोक भयभीत थे. त्रिपुरासुर ने स्वर्ग लोक पर भी अपना अधिकार जमा लिया था. त्रिपुरासुर ने प्रयाग में काफी दिनों तक तप किया था. उसके तप से तीनों लोक जलने लगे. तब ब्रह्मा जी ने उसे दर्शन दिए, त्रिपुरासुर ने उनसे वरदान मांगा कि उसे देवता, स्त्री, पुरुष, जीव, जंतु, पक्षी, निशाचर न मार पाएं. इसी वरदान से त्रिपुरासुर अमर हो गया और देवताओं पर अत्याचार करने लगा. सभी देवताओं ने मिलकर ब्रह्मा जी से इस दैत्य के अंत का उपाय पूछा. ब्रह्मा जी ने देवताओं को त्रिपुरासुर के अंत का रास्ता बताया. देवता भगवान शंकर के पास पहुंचे और उनसे त्रिपुरासुर को मारने के लिए प्रार्थना की. तब महादेव ने त्रिपुरासुर के वध का निर्णय लिया. महादेव ने तीनों लोकों में दैत्य को ढूंढ़ा. कार्तिक पूर्णिमा के दिन महादेव ने प्रदोष काल में अर्धनारीश्वर के रूप में त्रिपुरासुर का वध किया. उसी दिन देवताओं ने शिवलोक यानी काशी में आकर दीपावली मनाई.

भगवान विष्णु ने लिया था पहला अवतार

अपने पहले अवतार में भगवान विष्णु ने मीन अर्थात मछली का रूप धारण किया था.  भगवान को यह अवतार वेदों की रक्षा,प्रलय के अंत तक सप्तऋषियों,अनाजों एवं राजा सत्यव्रत की रक्षा के लिए लेना पड़ा था.  इसी से सृष्टि का निर्माण कार्य फिर से आसान हो सका था.

कार्तिक पूर्णिमा में गंगा स्नान

कार्तिक पूर्णिमा की स्नान के सम्बन्ध में ऋषि अंगिरा ने लिखा है. इस दिन सबसे पहले हाथ-पैर धो लें फिर आचमन करके हाथ में कुशा लेकर स्नान करें. यदि स्नान में कुश और दान करते समय हाथ में जल व जप करते समय संख्या का संकल्प नहीं किया जाये तो कर्म फलों से सम्पूर्ण पुण्य की प्राप्ति नहीं होती है. दान देते समय जातक हाथ में जल लेकर ही दान करें.

कार्तिक पूर्णिमा के दिन करें ये चीजें

  • इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का काफी महत्व है. ऐसे में अगर संभव हो तो सुबह नदी में स्नान जरूर करें.
  • नदी में स्नान करना मुमकिन नहीं है तो घर में ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करे.
  • इस दिन सत्यनारायण की कथा पढ़ने का खास महत्व होता है.
  • कार्तिक पूर्णिमा के दिन शाम को भगवना विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें
  • किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं और यथा शक्ति दान करें.
  • इस दिन तुलसी के सामने दीपक जरूर जलाएं.
  • कार्तिक पूर्णिमा के गरीबों को चावल दान करने से चन्द्र ग्रह शुभ फल देता है.
  • इस शिवलिंग पर कच्चा दूध, शहद व गंगाजल मिलकार चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते है.
  •  कार्तिक पूर्णिमा को घर के मुख्यद्वार पर आम के पत्तों से बनाया हुआ तोरण अवश्य बांधे.

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