Thursday, November 26, 2020

प्राइवेट बैंकों में 26 फीसदी की जा सकती है प्रमोटर की हिस्सेदारी, हिंदुजा ग्रुप ने किया स्वागत

हिंदूजा ग्रुप ऑफ कंपनीज (इंडिया) के चेयरमैन अशोक हिंदुजा

आरबीआई (RBI) प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में प्रमोटर की हिस्सेदारी की सीमा मौजूदा 15 फीसदी से बढ़ाकर 26 फीसदी करने पर विचार कर रहा है. हिंदुजा ग्रुप (Hinduja Group) ने इसका स्वागत किया है.

नई दिल्ली. हिंदुजा ग्रुप (Hinduja Group) ने प्राइवेट बैंकों (Private Bank) में प्रमोटर की हिस्सेदारी बढ़ाकर 26 फीसदी करने का पक्ष लेते हुए कहा कि वह इस पर अमल करने में अग्रणी रहेगा. अभी प्राइवेट बैंकों में प्रमोटर को 15 प्रतिशत तक हिस्सेदारी रखने की मंजूरी है. हिंदूजा समूह निजी क्षेत्र के इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) का प्रमोटर है. बता दें कि आरबीआई (RBI) प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में प्रमोटर की हिस्सेदारी की सीमा मौजूदा 15 फीसदी से बढ़ाकर 26 फीसदी करने पर विचार कर रहा है.

इंटर्नल वर्किंग ग्रुप की सिफारिश का हिंदुजा ग्रुप ने किया स्वागत
हिंदूजा ग्रुप ऑफ कंपनीज (इंडिया) के चेयरमैन अशोक हिंदुजा ने इस खबर का स्वागत करते हुए कहा कि एक उत्कृष्ट बैंकिंग व्यवस्था में बचाव का प्रथम उपाय शेयरधारकों की हिस्सेदारिता होनी चाहिए. उन्होंने एक बयान में कहा कि रिजर्व बैंक के इंटर्नल वर्किंग ग्रुप (आईडब्ल्यूजी) की रिपोर्ट 26 प्रतिशत हिस्सेदारी पर विचार कर प्रमोटर की हिस्सेदारी के बारे में सही दिशा में बात कर रही है. उन्होंने कहा, ”यह प्रमोटर को अधिक जवाबदेह बनाकर संस्थागत ढांचे को मजबूत बनाने में मदद करता है.”

RBI के इंटर्नल वर्किंग ग्रुप के इस प्रस्ताव से बदल जाएगी बैंकिंग इंडस्ट्रीगौरतलब है कि आरबीआई के इंटर्नल वर्किंग ग्रुप ने सुझाव दिया है कि बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (Non-Banking Financial Company) कुछ मानदंडों को पूरा करने पर  बैंक में बदला जा सकता है. इंटर्नल वर्किंग ग्रुप की सिफारिश के मुताबिक, वैसे एनबीएफसी (NBFC) जिनका पूंजी 50,000 करोड़ रुपये से अधिक है और 10 साल कारोबार में पूरा हो चुका है, उनको बैंक में बदला जा सकता है. इसके अलावा ग्रुप ने सुझाव दिया है कि पेमेंट्स बैंक जिन्हें 3 साल का अनुभव है, उन्हें स्मॉल फाइनेंस बैंक में बदला जा सकता है.

इंटर्नल वर्किंग ग्रुप की अन्य सिफारिश
>> बैंक के प्रोमोटर की हिस्सेदारी को मौजूदा 15 फीसदी से बढ़ाकर 26 फीसदी करने की सिफारिश
>> बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 में संशोधन के बाद बड़े कॉरपोरेट और इंडस्ट्रियल हाउसेस को बैंकों के प्रोमोटर के तौर पर इजाजत दिया जाए.
>> नए बैंकों के लिए जरूरी पूंजी को 500 करोड़ से बढ़ाकर 1000 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए.
>> स्मॉल फाइनेंस बैंक के लिए पूंजी को 200 करोड़ से बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए.

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