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ओपेक के फैसले का असर: क्रूड महंगाई से पेट्रोल का भाव जल्द नए रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच सकता है, डीजल प्राइस भी बढ़ने की आशंका

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नई दिल्ली12 मिनट पहले

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दिल्ली में 4 अक्टूबर 2018 को पेट्रोल का प्राइस 84 रुपए प्रति लीटर और डीजल का प्राइस 30 जुलाई 2020 को 81.94 रुपए प्रति लीटर के ऑल टाइम हाई लेवल पर था

  • 29 दिनों के विराम के बाद बुधवार को दिल्ली में प्रति लीटर पेट्र्रोल 26 पैसे बढ़कर 83.97 रुपए का हुआ
  • डीजल का भाव भी बुधवार को 25 पैसे बढ़ाकर प्रति लीटर 74.12 रुपए कर दिया गया

ओपेक समझौते और सऊदी अरब द्वारा तेल उत्पादन में भारी कटौती करने के एकतरफा फैसले के बाद अब देश में पेट्र्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। उधर रिकॉर्ड हाई लेवल के पास पहुंच चुका पेट्रोल प्राइस जल्द ही पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त करता हुए नए रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच सकता है। 4 अक्टूबर 2018 को पेट्रोल का प्राइस दिल्ली में 84 रुपए प्रति लीटर के ऑल टाइम हाई लेवल पर था।

29 दिनों के विराम के बाद सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) ने बुधवार को दिल्ली में प्रति लीटर पेट्र्रोल का प्राइस 26 पैसे बढ़ाकर 83.97 रुपए कर दिया, जो ऑल टाइम हाई से सिर्फ 3 पैसे नीचे है। डीजल का भाव भी 25 पैसे बढ़ाकर प्रति लीटर 74.12 रुपए कर दिया गया। दिल्ली में डीजल प्राइस ने 30 जुलाई 2020 को 81.94 रुपए प्रति लीटर का ऑल टाइम हाई लेवल बनाया था।

सऊदी अरब के एकतरफा तेल उत्पादन घटाने के फैसले से क्रूड 5% उछला, 10 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंचा

सऊदी अरब ने मंगलवार को अपने तेल उत्पादन में 10 बैरल रोजाना कटौती करने की एकतरफा घोषणा कर दी। इससे क्रूड प्राइस को सपोर्ट मिला और वे उछलकर 10 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गए। ब्रेंट क्रूड बुधवार शाम करीब 7 बजे 53.93 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। मंगलवार को यह 53.60 डॉलर पर बंद हुआ था। इससे पहले ब्रेंट क्रूड 24 फरवरी 2020 को आखिरी बार 50 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर 50.52 डॉलर पर बंद हुआ था। WTI बुधवार को 49.68-50.59 डॉलर के बीच ट्रेड कर रहा था। मंगलवार को यह 49.93 डॉलर पर बंद हुआ था। इससे पहले 17-24 फरवरी के सप्ताह में यह 53-44 डॉलर के रेंज में ट्रेड कर रहा था। सोमवार के मुकाबले ब्रेंट क्रूड के भाव में 5.6 फीसदी और WTI के भाव में 4.8 फीसदी तेजी आई है।

ओपेक समझौते के बाद फरवरी और मार्च में मौजूदा स्तर से 9.25 लाख बैरल रोजाना घटेगा क्रूड का उत्पादन

मंगलवार के ओपेक प्लस समूह के समझौता के तहत सऊदी अरब ने फरवरी और मार्च में 10 लाख बैरल रोजाना की उत्पादन कटौती करने का एकतरफा फैसला किया। वहीं समझौते के तहत रूस और कजाकिस्तान को सम्मिलित रूप से 75,000 बैरल रोजाना उत्पादन बढ़ाने की अनुमति मिली। ग्रुप के अन्य सदस्य अपने उत्पादन को पुराने स्तर पर कायम रखेंगे। इससे कुल मिलाकर फरवरी और मार्च का उत्पादन मौजूदा स्तर से 9.25 लाख बैरल रोजाना घट जाएगा। कजाकिस्तान और रूस को सीजनल कारणों से उत्पादन में मामूली बढ़ोतरी करने की अनुमति दी गई। वहीं, उत्पादन बढ़ाने के इराक, संयुक्त अरब अमीरात और नाइजीरिया के पुराने अनुरोध खारिज हो गए।

जनवरी में 5 लाख बैरल रोजाना बढ़ा है उत्पादन

ओपेक प्लस ने दिसंबर में जनवरी से 5 लाख बैरल रोजाना उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया था। इस फैसले को ओपेक प्लस की 13वीं बैठक में मंगलवार को कायम रखा गया। यानी जनवरी 2021 में उत्पादन कटौती 77 लाख बैरल रोजाना से घटकर 72 लाख बैरल रोजाना के स्तर पर आ गई। लेकिन फरवरी और मार्च में कटौती का स्तर फिर से बढ़कर 81.25 लाख बैरल रोजाना पर पहुंच जाएगा।

सरकार पर पेट्रोल-डीजल टैक्स घटाने का बढ़ सकता है दबाव

देश में पेट्रोल-डीजल का रिटेल प्राइस क्रूड को नहीं, बल्कि पेट्र्रोल-डीजल के ग्लोबल प्राइस को ट्रैक करता है, लेकिन मोटे तौर पर इन उत्पादों का भाव क्रूड प्राइस से लिंक होता है। क्रूड प्राइस बढ़ने से सरकार पर पेट्रोल-डीजल टैक्स घटाने का दबाव बढ़ सकता है। अभी ये टैक्स पेट्रोल-डीजल के बेसिक प्राइस के मुकाबले 100 फीसदी से भी ज्यादा हैं।

भारत के कुल तेल आयात में ओपेक प्लस का हिस्सा 83%

ओपेक प्लस का फैसला भारत के लिए अहम है, क्योंकि क्रूड के ग्लोबल प्रॉडक्शन में ओपेक प्लस का हिस्सा करीब 40 फीसदी है। भारत के कुल तेल आयात में ओपेक प्लस का हिस्सा 83 फीसदी है। महामारी के दौरान जब क्रूड प्राइस कम था, तब भारत ने महज 19 डॉलर प्रति बैरल के औसत प्राइस पर अपने सभी रणनीतिक क्रूड भंडार भर लिए थे। तेल आयात पर भारत को आम तौर पर काफी खर्च करना पड़ता है।

क्रूड प्राइस बढ़ने से देश में बढ़ती है महंगाई

क्रूड प्राइस बढ़ने से देश में महंगाई और व्यापार घाटा में बढ़ोतरी होती है। देश का क्रूड आयात खर्च भी बढ़ता है। औसत क्रूड प्राइस में हर एक डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का सालाना क्रूड आयात खर्च 10,700 करोड़ रुपए बढ़ जाता है। भारत ने 2019-20 में भारत ने क्रूड आयात पर 101.4 अरब डॉलर और 2018-19 में 111.9 अरब डॉलर खर्च किया था। 2019-20 में भारतीय बास्केट के क्रूड का कॉस्ट 69.88 डॉलर प्रति बैरल, 2018-19 में भी 69.88 डॉलर और 2017-18 में 56.43 डॉलर था।

महामारी के दौरान भारतीय बास्केट के क्रूड का प्राइस गिरा था

इस साल महामारी के कारण क्रूड प्राइस में भारी गिरावट आई थी। पेट्र्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के मुताबिक भारतीय बास्केट का भाव अप्रैल में 19.90 डॉलर प्रति बैरल, मई में 30.60 डॉलर, जून में 40.63 डॉलर, जुलाई में 43.35 डॉलर, अगस्त में 44.19 डॉलर और सितंबर में 41.35 डॉलर था। 4 जनवरी को यह प्राइस 51.95 डॉलर था। भारतीय बास्केट ओमान, दुबई और ब्रेंट क्रूड को मिलाकर बनता है।

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